Sunday, 29 March 2026

 

KHOJ

आज पूछा किसी ने खोज के बारे में बोलना है।

ऐसी कोई चीज जो तुम्हारी थी और खो गई हो।

जिसका पता तुम्हें था, पर अब नहीं हो।

ऐसी एक  दो या अनेकों चीजें जो समय के साथ खो गई हो।

बहुत समय से सोच रही थी कि हां मुझे बोलना है,

बताना है कि कुछ नहीं काफी कुछ खो गया है।

समय के साथ उन चीज़ों की यादें भी धुंधली हो चली हैं।

आज कुछ वक्त निकला है, चुप चाप सी दुपहरी में

वो बंद पड़े बक्से की चाबी उठायी है।

अभी तो बस बक्से को देख रही हूं।

हिम्मत जुटा रही हूं, पुराने ताले खोलने के लिए।

पता नहीं क्या कुछ मिलेगा, या शायद कुछ भी ना मिलेगा।

एक डर है मन में, उन चीज़ों को देख कर अपने आज से परेशान तो ना होंगी।

कल परसों की चीजें हैं, पुरानी सी पर अब भी लगती है कुछ अपनी सी।

देखो, क्या मिला

एक डायरी जिसमें कुछ लिखा है

पन्ने पलटे तो लगा वापस उसी मोड़ पर अपने आप को देख रही थी।

दो चुटिया बनाए, कलम को अपने दांतों में दबा

कुछ गहरी सोच और कुछ गहरी लाइनें

अरे देखो, एक ब्रश और छोटी छोटी पन्नों में काले पेंट से दूर पहाड़ बने हुए

ये भी है उस वक्त का जब हाथ में ब्रश या कलम आते ही, किताबों के किनारे पे उभर आती थी एक तस्वीर।

पुराने जर्द पड़े धागों में घुंघरू, कुछ टूटे हुए, कुछ अभी भी बजते हुए

पता नहीं, इस बकसे में कब बंद हो गए?

ये जो मेरी चीज़ थी

हम्म्म्म...खैर जाने दो, कुछ यादें उनकी बस रहने दो।

शायद फिर किसी दिन इनकी ज़रूरत पड़े

आज इन्हें यहीं फिर रहने दो.


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