Thursday, 19 July 2018


हमारी कहानी , हमारी ज़ुबानी 


सात समंदर पार से 
रानी के दरबार से 
कश्ती पर रखे पाँव 
आये अँगरेज़ लगाने दाव 

भूगोल में नहीं था ऐसा न्यारा 
सोने की चिड़िया सा देश हमारा 
सजा था हर कानन 
स्वर्ण रत्नों से हर कण कण 
गूंजती थी हवाओं में तान मधुर 
सुनती थी सपनों में गान मधुर 

किस्से कहानियों से न भरा उसका दिल 
अँगरेज़ आये करने मेरी माँ को हासिल 
आतुर मन पर रख कर काबू 
मीठी बातें पर बगल में चाकू 
खेला उसने ऐसा खेल 
चली उसने ऐसी चाल 
क्षण भर में हुई काया पलट 
लुटा दरबार , लूटी दौलत 
जो कभी थे राजा, अब हुए रंक 
सूर्य सी थी जिनकी शोभा 
धूमिल हो गयी उनकी आभा 
गिरे पृथ्वी पर जैसे पक्षी बिन पंख 
हाय री ! कैसी कटु दशा , कैसा प्रपंच 

छाया  निष्ठुरता का ऐसा ग्रहण 
बलवान हुए निर्धन 
फुट फुट कर रोया यह चमन 
अब कौन करे अँधेरे को रोशन 
ऐसे में वीरों की निकली टोली 
खेलने को आतुर रक्त की होली 
हर नर नारी बने सिपाही 
हल्ला बोल बड़े उत्साही 
नाना , तात्या, लक्ष्मीबाई 
रणबांकुरों की सुनो गवाही 
धरती लाल, आसमान लाल 
प्राण हराये  पर न था मलाल 

अँगरेज़ परचम की परछाई 
लगने लगी धरा परायी 
फिर आया ऐसा रणवीर 
लाठी लेकर एक फ़कीर 
लढा वो बिन शमशीर 
बदली उसने हमारी तकदीर 
दी आज़ादी , आया भूचाल 
साबरमती के संत तूने 
कर दिया कमाल 

लेकर अपना ताना बाना 
अँगरेज़ हुए रवाना 
आओ गायें यह तराना 
इतिहास का यह फ़साना 
नव युवकों को भी बताना। 



















1 comment:

  1. This is quite nice and just in time for Independence Day celebrations. I like the way you have mixed Hindi and Urdu words to create the rhyme.

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